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🌑 शनि देव
पूजा, उपाय और मंत्र
शनिदेव कर्मफल दाता हैं—जो मेहनत को फल देते हैं और गलत कर्मों पर रोक लगाते हैं।
event ⭐ शनि पूजा कब करें?
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1) धन की समस्या / Financial Problems
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2) नौकरी–करियर में रुकावट / Career Problems
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3) स्वास्थ्य परेशानियाँ / Health Issues
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4) पारिवारिक तनाव / Family Conflicts
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5) बदकिस्मती / लगातार बाधाएँ
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water_drop ⭐ सरसों तेल आधारित सरल उपाय
Simple Mustard Oil Remedy
हर शनिवार सुबह—
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कटोरी में सरसों तेल लें
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उसमें अपना चेहरा देखें
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यह तेल शनि मंदिर में चढ़ाएँ
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घर में सरसों तेल का दीपक जलाएँ
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काले कुत्ते/कौए को भोजन दें
auto_awesome 🕉 शनि मंत्र और इनके उपयोग
1️⃣ मूल शनि मंत्र (सबसे सरल और प्रभावी)
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
कब पढ़ें: रोज़, शनिवार को, सामान्य परेशानियों या शांति हेतु।
जप: 11/21/108 बार
2️⃣ शनि बीज मंत्र (गहन शनि प्रभाव के लिए)
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
कब पढ़ें: साढ़े–साती, ढैय्या, गंभीर ग्रह-दोष, ज्योतिषीय सलाह पर।
3️⃣ शनि स्तुति (पूजा के समय पढ़ें)
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
कब पढ़ें: किसी भी शनि पूजा, आरती, दीप जलाते समय।
4️⃣ शनि गायत्री मंत्र (गहन सुरक्षा हेतु)
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि
तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥
कब पढ़ें: मानसिक/आध्यात्मिक सुरक्षा, ग्रहदोष, नकारात्मक ऊर्जा के समय।
जप: 108 बार (एक माला) प्रतिदिन
📜 श्री शनि चालीसा
Shri Shani Chalisa
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल । दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज । करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥ जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥ चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥ परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥ कुण्डल श्रवन चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमकै ॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥ पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥ सौरी, मन्द शनी दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥ जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥ पर्वतहू तृण होइ निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥ राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो । कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥ वनहुं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चुराई ॥ लषणहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥ रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥ दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥ नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥ हार नौलखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥ भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलहिं घर कोल्हू चलवायो ॥ विनय राग दीपक महँ कीन्हयों । तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥ हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥ तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥ श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई । पारवती को सती कराई ॥ तनिक विकलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा ॥ पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥ कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥ रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥ शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥ वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥ जम्बुक सिह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥ गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥ गर्दभ हानि करै बहु काजा । सिह सिद्ध्कर राज समाजा ॥ जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥ जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥ तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥ लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥ समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥ जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥ अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥ जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥ पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥ कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥ ॥ दोहा ॥ पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार । करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥ ॥इति श्री शनि चालीसा॥
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